वाल्मीकि रामायण 6.123.14
अकाले पुष्पशबलाः फलवन्तश्च पादपाः ।भविष्यन्ति महेष्वास नद्यश्च सलिलायुताः॥
akāle puṣpaśabalāḥ phalavantaśca pādapāḥ |bhaviṣyanti maheṣvāsa nadyaśca salilāyutāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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