वाल्मीकि रामायण 6.124.6
इत एव पथा क्षिप्रं प्रतिगच्छामि तां पुरीम् ।अयोध्यामागतो ह्येष पन्थाः परमदुर्गमः॥
ita eva pathā kṣipraṃ pratigacchāmi tāṃ purīm |ayodhyāmāgato hyeṣa panthāḥ paramadurgamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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