वाल्मीकि रामायण 6.125.10
हीनं रतिगुणैः सर्वैरभिहन्तारमाहवे ।त्यजन्ति नृपतिं सैन्याः संविग्नास्तं नरेश्वरम्॥
hīnaṃ ratiguṇaiḥ sarvairabhihantāramāhave |tyajanti nṛpatiṃ sainyāḥ saṃvignāstaṃ nareśvaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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