वाल्मीकि रामायण 6.125.12
ततस्तान् पूजितान् दृष्ट्वा रत्नैरर्थैश्च यूथपान् ।आरुरोह ततो रामस्तद्विमानमनुत्तमम्॥
tatastān pūjitān dṛṣṭvā ratnairarthaiśca yūthapān |āruroha tato rāmastadvimānamanuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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