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वाल्मीकि रामायण 6.125.17
विष्किन्धां प्रतियाह्याशु स्वसैन्येनाभिसंवृतः॥
viṣkindhāṃ pratiyāhyāśu svasainyenābhisaṃvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविष्किन्धां प्रतियाह्याशु स्वसैन्येनाभिसंवृतः॥
viṣkindhāṃ pratiyāhyāśu svasainyenābhisaṃvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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