वाल्मीकि रामायण 6.125.18
स्वराज्ये वस लङ्कायां मया दत्ते विभीषण ।न त्वां धर्षयितुं शक्ताः सेन्द्रा अपि दिवौकसः॥
svarājye vasa laṅkāyāṃ mayā datte vibhīṣaṇa |na tvāṃ dharṣayituṃ śaktāḥ sendrā api divaukasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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