वाल्मीकि रामायण 6.125.19
अयोध्यां प्रतियास्यामि राजधानीं पितुर्मम ।अभ्यनुज्ञातुमिच्छामि सर्वांश्चामन्त्रयामि वः॥
ayodhyāṃ pratiyāsyāmi rājadhānīṃ piturmama |abhyanujñātumicchāmi sarvāṃścāmantrayāmi vaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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