वाल्मीकि रामायण 6.125.21
अयोध्यां गन्तुमिच्छामः सर्वान्नयतु नो भवान् ।उद्युक्ता विचरिष्यामो वनानि नगराणि च॥
ayodhyāṃ gantumicchāmaḥ sarvānnayatu no bhavān |udyuktā vicariṣyāmo vanāni nagarāṇi ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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