वाल्मीकि रामायण 6.125.23
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा वानरैः सविभीषणैः ।अब्रवीद्राघवः श्रीमान् ससुग्रीवविभीषणान्॥
evamuktastu dharmātmā vānaraiḥ savibhīṣaṇaiḥ |abravīdrāghavaḥ śrīmān sasugrīvavibhīṣaṇān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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