वाल्मीकि रामायण 6.125.26
ततस्तत् पुष्पकं दिव्यं सुग्रीवः सह सेनया ।अध्यारोहत्त्वरन् शीघ्रं सामात्यश्च विभीषणः॥
tatastat puṣpakaṃ divyaṃ sugrīvaḥ saha senayā |adhyārohattvaran śīghraṃ sāmātyaśca vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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