वाल्मीकि रामायण 6.125.27
तेष्वारूढेषु सर्वेषु कौबेरं परमासनम् ।राघवेणाभ्यनुज्ञातमुत्पपात विहायसम्॥
teṣvārūḍheṣu sarveṣu kauberaṃ paramāsanam |rāghaveṇābhyanujñātamutpapāta vihāyasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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