वाल्मीकि रामायण 6.126.1
अनुज्ञातंस्तु रामेण तद्विमानमनुत्तमम् ।उत्पपात महामेघः श्वसनेनोद्धतो यथा॥
anujñātaṃstu rāmeṇa tadvimānamanuttamam |utpapāta mahāmeghaḥ śvasanenoddhato yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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