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वाल्मीकि रामायण 6.126.27
सुग्रीवेणाभ्यनुज्ञाता गन्तुं सर्वैश्च वानरैः ॥
sugrīveṇābhyanujñātā gantuṃ sarvaiśca vānaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसुग्रीवेणाभ्यनुज्ञाता गन्तुं सर्वैश्च वानरैः ॥
sugrīveṇābhyanujñātā gantuṃ sarvaiśca vānaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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