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वाल्मीकि रामायण 6.126.28
मम चापि प्रियं कार्यमयोध्यादर्शनेन च॥
mama cāpi priyaṃ kāryamayodhyādarśanena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंमम चापि प्रियं कार्यमयोध्यादर्शनेन च॥
mama cāpi priyaṃ kāryamayodhyādarśanena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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