वाल्मीकि रामायण 6.126.37
पर्णशाला तथा चित्रा दृश्यते शुभदर्शना ।यत्र त्वं राक्षसेन्द्रेण रावणेन हृता बलात्॥
parṇaśālā tathā citrā dṛśyate śubhadarśanā |yatra tvaṃ rākṣasendreṇa rāvaṇena hṛtā balāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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