वाल्मीकि रामायण 6.126.50
ततस्ते वानराः सर्वे राक्षसश्च विभीषणः ।उत्पत्योत्पत्य ददृशुस्तां पुरीं शुभदर्शनाम्॥
tataste vānarāḥ sarve rākṣasaśca vibhīṣaṇaḥ |utpatyotpatya dadṛśustāṃ purīṃ śubhadarśanām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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