वाल्मीकि रामायण 6.127.11
रावणेन हृता भार्या बभूवेयमनिन्दिता ।मारीचदर्शनं चैव सीतोन्मथनमेव च॥
rāvaṇena hṛtā bhāryā babhūveyamaninditā |mārīcadarśanaṃ caiva sītonmathanameva ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें