वाल्मीकि रामायण 6.127.12
कबन्धदर्शनं चैव पम्पाभिगमनं तथा ।सुग्रीवेण च ते सख्यं यच्च वाली हतस्त्वया॥
kabandhadarśanaṃ caiva pampābhigamanaṃ tathā |sugrīveṇa ca te sakhyaṃ yacca vālī hatastvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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