वाल्मीकि रामायण 6.127.19
तथेति च प्रतिज्ञाते वचनात् समनन्तरम् ।अभवन् पादपास्तत्र स्वर्गपादपसन्निभाः॥
tatheti ca pratijñāte vacanāt samanantaram |abhavan pādapāstatra svargapādapasannibhāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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