वाल्मीकि रामायण 6.127.20
निष्फलाः फलिनश्चासन् विपुष्पाः पुष्पशालिनः ।शुष्काः समग्रपत्रास्ते नगाश्चैव मधुस्रवाः॥
niṣphalāḥ phalinaścāsan vipuṣpāḥ puṣpaśālinaḥ |śuṣkāḥ samagrapatrāste nagāścaiva madhusravāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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