वाल्मीकि रामायण 6.127.4
पङ्कदिग्धस्तु भरतो जटिलस्त्वां प्रतीक्षते ।पादुके ते पुरस्कृत्य सर्वं च कुशलं गृहे॥
paṅkadigdhastu bharato jaṭilastvāṃ pratīkṣate |pāduke te puraskṛtya sarvaṃ ca kuśalaṃ gṛhe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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