वाल्मीकि रामायण 6.16.12
यथा शरदि मेघानाम् सिञ्चातामपि गर्जताम् ।न भवत्यमुबसम्क्लेदस्तथानार्येषु सौहृदम्॥
yathā śaradi meghānām siñcātāmapi garjatām |na bhavatyamubasamkledastathānāryeṣu sauhṛdam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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