वाल्मीकि रामायण 6.17.15
स च न प्रतिजग्राह रावणः काल चोदितः ।उच्यमानो हितम् वाक्यम् विपरीत इव औषधम्॥
sa ca na pratijagrāha rāvaṇaḥ kāla coditaḥ |ucyamāno hitam vākyam viparīta iva auṣadham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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