वाल्मीकि रामायण 6.17.2
तम् मेरु शिखर आकारम् दीप्ताम् इव शत ह्रदाम् ।गगनस्थम् महीस्थास् ते ददृशुर् वानर अधिपाः॥
tam meru śikhara ākāram dīptām iva śata hradām |gaganastham mahīsthās te dadṛśur vānara adhipāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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