वाल्मीकि रामायण 6.17.32
यद् उक्तम् कपि राजेन रावण अवरजम् प्रति ।वाक्यम् हेतुमद् अत्यर्थम् भवद्भिर् अपि तत् श्रुतम्॥
yad uktam kapi rājena rāvaṇa avarajam prati |vākyam hetumad atyartham bhavadbhir api tat śrutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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