वाल्मीकि रामायण 6.17.47
ततो मैन्दस् तु सम्प्रेक्ष्य नय अपनय कोविदः ।वाक्यम् वचन सम्पन्नो बभाषे हेतुमत्तरम्॥
tato maindas tu samprekṣya naya apanaya kovidaḥ |vākyam vacana sampanno babhāṣe hetumattaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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