वाल्मीकि रामायण 6.18.14
महोदरमहापार्स्वौ राक्षसश्चाप्यकम्पनः ।अवीकपास्तु तप्यैते लोकपालसमा युधि॥
mahodaramahāpārsvau rākṣasaścāpyakampanaḥ |avīkapāstu tapyaite lokapālasamā yudhi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें