वाल्मीकि रामायण 6.18.15
दशकोटिसहस्राणि रक्षसाम् कामरूपिणाम् ।माम्सशोणितभक्ष्याणाम् लङ्कापुरनिवासिनाम्॥
daśakoṭisahasrāṇi rakṣasām kāmarūpiṇām |māmsaśoṇitabhakṣyāṇām laṅkāpuranivāsinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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