वाल्मीकि रामायण 6.18.2
खात् पपात अवनिम् हृष्टो भक्तैर् अनुचरैः सह ।स तु रामस्य धर्म आत्मा निपपात विभीषणः॥
khāt papāta avanim hṛṣṭo bhaktair anucaraiḥ saha |sa tu rāmasya dharma ātmā nipapāta vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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