वाल्मीकि रामायण 6.18.25
तेन च इमम् महाप्राज्ञम् अभिषिन्च विभीषणम् ।राजानम् रक्षसाम् क्षिप्रम् प्रसन्ने मयि मानद॥
tena ca imam mahāprājñam abhiṣinca vibhīṣaṇam |rājānam rakṣasām kṣipram prasanne mayi mānada ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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