वाल्मीकि रामायण 6.18.39
विभीषणेन यत् तु उक्तम् अस्मिन् काले सुख आवहम् ।अबद्ध्वा सागरे सेतुम् घोरे अस्मिन् वरुण आलये॥
vibhīṣaṇena yat tu uktam asmin kāle sukha āvaham |abaddhvā sāgare setum ghore asmin varuṇa ālaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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