वाल्मीकि रामायण 6.18.42
एवम् उक्तः कुश आस्तीर्णे तीरे नद नदी पतेः ।सम्विवेश तदा रामो वेद्याम् इव हुत अशनः॥
evam uktaḥ kuśa āstīrṇe tīre nada nadī pateḥ |samviveśa tadā rāmo vedyām iva huta aśanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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