वाल्मीकि रामायण 6.2.25
हतमित्येव तम् मन्ये युद्धे शत्रुनिबर्हण ।किमुक्त्वा बहुधा चापि सर्वथा विजया भवान्॥
hatamityeva tam manye yuddhe śatrunibarhaṇa |kimuktvā bahudhā cāpi sarvathā vijayā bhavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें