वाल्मीकि रामायण 6.22.48
असौ तु सागरो भीमः सेतुकर्मदिदृक्षया ।ददौ दण्डभयाद्गाधम् राघवाय महोदधिः॥
asau tu sāgaro bhīmaḥ setukarmadidṛkṣayā |dadau daṇḍabhayādgādham rāghavāya mahodadhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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