वाल्मीकि रामायण 6.22.58
करीरान् बकुलान्निम्बान् समाजह्रुरितस्ततः ।हस्तिमात्रान् महाकायाः पाषाणाम्श्च महाबलाः॥
karīrān bakulānnimbān samājahruritastataḥ |hastimātrān mahākāyāḥ pāṣāṇāmśca mahābalāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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