वाल्मीकि रामायण 6.22.59
पर्वताम्श्च समुत्पाट्य यन्त्रैः परिवहन्ति च ।प्रक्षिप्यमाणैर् अचलैः सहसा जलम् उद्धतम्॥
parvatāmśca samutpāṭya yantraiḥ parivahanti ca |prakṣipyamāṇair acalaiḥ sahasā jalam uddhatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें