वाल्मीकि रामायण 6.22.61
सूत्राण्यन्ये प्रगृह्णन्ति ह्यायतम् शतयोजनम् ।नलः चक्रे महासेतुम् मध्ये नद नदी पतेः॥
sūtrāṇyanye pragṛhṇanti hyāyatam śatayojanam |nalaḥ cakre mahāsetum madhye nada nadī pateḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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