वाल्मीकि रामायण 6.22.7
तमश्च लोकमावव्रे दिशश्च न चकाशिरे ।प्रतिचुक्षुभिरे चाशु सराम्सि सरितस्तदा॥
tamaśca lokamāvavre diśaśca na cakāśire |praticukṣubhire cāśu sarāmsi saritastadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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