वाल्मीकि रामायण 6.22.76
तम् अचिन्त्यम् असह्यम् च अद्भुतम् लोम हर्षणम् ।ददृशुः सर्व भूतानि सागरे सेतु बन्धनम्॥
tam acintyam asahyam ca adbhutam loma harṣaṇam |dadṛśuḥ sarva bhūtāni sāgare setu bandhanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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