वाल्मीकि रामायण 6.23.15
सविभीषणसुग्रीवाः सर्वे ते वानरर्षभाः ।प्रतस्थिरे विनर्दन्तो धृतानाम् द्विषताम् वधे॥
savibhīṣaṇasugrīvāḥ sarve te vānararṣabhāḥ |pratasthire vinardanto dhṛtānām dviṣatām vadhe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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