वाल्मीकि रामायण 6.23.2
परिगृह्योदकम् शीतम् वनानि फलवन्ति च ।बलौ घम् सम्विभज्येमम् व्यूह्य तिष्ठेम लक्ष्मण॥
parigṛhyodakam śītam vanāni phalavanti ca |balau gham samvibhajyemam vyūhya tiṣṭhema lakṣmaṇa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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