वाल्मीकि रामायण 6.23.9
ह्रस्वो रूक्षोऽप्रशस्तश्च परिवेषस्तु लोहितः ।आदित्ये विमले वीलम् लक्ष्म लक्ष्मण दृश्यते॥
hrasvo rūkṣo'praśastaśca pariveṣastu lohitaḥ |āditye vimale vīlam lakṣma lakṣmaṇa dṛśyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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