वाल्मीकि रामायण 6.28.13
आदित्यम् आहरिष्यामि न मे क्षुत् प्रतियास्यति ।इति सम्चिन्त्य मनसा पुरा एष बल दर्पितः॥
ādityam āhariṣyāmi na me kṣut pratiyāsyati |iti samcintya manasā purā eṣa bala darpitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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