वाल्मीकि रामायण 6.28.4
एषाम् कोटि सहस्राणि नव पन्च च सप्त च ।तथा शन्ख सहस्राणि तथा वृन्द शतानि च॥
eṣām koṭi sahasrāṇi nava panca ca sapta ca |tathā śankha sahasrāṇi tathā vṛnda śatāni ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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