वाल्मीकि रामायण 6.34.1
अथ ताम् जात सम्तापाम् तेन वाक्येन मोदिताम् ।सरमा ह्लादयाम् आस महीं दग्धामिवाम्भसा॥
atha tām jāta samtāpām tena vākyena moditām |saramā hlādayām āsa mahīṃ dagdhāmivāmbhasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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