वाल्मीकि रामायण 6.36.2
स बद्ध्वा भ्रु कुटिम् वक्त्रे क्रोधस्य वzअम् आगतः ।अमर्षात् परिवृत्त अक्षो माल्यवन्तम् अथ अब्रवीत्॥
sa baddhvā bhru kuṭim vaktre krodhasya vazam āgataḥ |amarṣāt parivṛtta akṣo mālyavantam atha abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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