वाल्मीकि रामायण 6.37.37
सुवेल आरोहणे बुद्धिम् चकार मतिमान् मतिम् ।रमणीयतरम् दृष्ट्वा सुवेलस्य गिरेस्तट्म्॥
suvela ārohaṇe buddhim cakāra matimān matim |ramaṇīyataram dṛṣṭvā suvelasya girestaṭm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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