वाल्मीकि रामायण 6.39.14
अन्ये तु हरि वीराणाम् यूथान् निष्क्रम्य यूथपाः ।सुग्रीवेण अभ्यनुज्नाता लन्काम् जग्मुः पताकिनीम्॥
anye tu hari vīrāṇām yūthān niṣkramya yūthapāḥ |sugrīveṇa abhyanujnātā lankām jagmuḥ patākinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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