वाल्मीकि रामायण 6.39.17
ऋक्षाः सिम्हा वराहाश् च महिषा वारणा मृगाः ।तेन शब्देन वित्रस्ता जग्मुर् भीता दिशो दश॥
ṛkṣāḥ simhā varāhāś ca mahiṣā vāraṇā mṛgāḥ |tena śabdena vitrastā jagmur bhītā diśo daśa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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