वाल्मीकि रामायण 6.39.19
शत योजन विस्तीर्णम् विमलम् चारु दर्शनम् ।श्लक्ष्णम् श्रीमन् महच् चैव दुष्प्रापम् शकुनैर् अपि॥
śata yojana vistīrṇam vimalam cāru darśanam |ślakṣṇam śrīman mahac caiva duṣprāpam śakunair api ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें